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ग्वालियर प्रेस क्लब परिसर में पौधारोपण एवं पक्षियों के लिये दाना-पानी सकोरे वितरण

ग्वालियर प्रेस क्लब परिसर में पौधारोपण एवं पक्षियों के लिये दाना-पानी सकोरे वितरण


प्राकृतिक संपत्ति को संरक्षित करना हम सबकी जिम्मेदारी


ग्वालियर। हरियाली प्रकृति का वरदान है हरियाल प्रकृति का श्रृंगार है प्रकृति के बिना मानव जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। प्रकृति से मिलने वाली संपत्ति से मानव जीवन पशु-पक्षी और संपूर्ण जीव जगत का जीवन चलता है। प्राकृतिक संपत्ती को संरक्षित करना हम सबकी जिम्मेदारी है। यह बात आज ग्वालियर प्रेस क्लब एवं मध्य प्रदेश पत्रकार संघ के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित पर्यावरण दिवस के अवसर पर उपस्थित मुख्य अतिथि पूर्व विधायक रमेश अग्रवाल ने कही इस मौके पर वरिष्ठ भाजपा नेता एवं दाना पानी, फोर बर्ड्स समूह के संयोजक राज चड्डा ग्वालियर प्रेस के अध्यक्ष राजेश शर्मा, सचिव सुरेश शर्मा, मध्य प्रदेश पत्रकार संघ के प्रदेशाध्यक्ष सुरेन्द्र माथुर, इलेक्ट्रोनिक मीडिया प्रकोष्ट प्रदेश अध्यक्ष राज दूबे, वरिष्ठ पत्रकार डॉ. सुरेश सम्राट, सुरेश दंडोतिया, बृज मोहन शर्मा, हरपाल सिंह चौहान, गोपाल लालवानी, अतुल सक्सेना, रामकिशन कटारे, विजय पांडे, रोशन जैन, मचल सिंह वैश्य, अंकुर जैन, फोटो जर्नलिस्ट प्रकोष्ठ के अध्यक्ष राजेश जायसवाल, रवि उपाध्याय, राकेश वर्मा, जयदीप सिकरवार, रविन्द्र चौहान, मुकेश बाथम, रघुवीर कुशवाह, विनोद मुहाने, कोक सिंह, संजय भटनागर सहित आशाराम बापू, संस्था के परमार एवं साधू संत उपस्थित थे। इस मौके पर ग्वालियर प्रेस क्लब परिसर में पौधारोपण के साथ दाना पानी, फोर बर्डस समुह ने पत्रकारों एवं उपस्थित जनों को पक्षियों के लिये दाना पानी एवं सकोरे वितरण किये। आसाराम बापू संस्था द्वारा कार्यक्रम में आये पत्रकार साथियों को शीतल जल वितरण किया गया। इस मौके पर पूर्व विधायक रमेश अग्रवाल ने कहा कि धरती हमारी मां है, धरती हमारी जननी है और प्रकृति हमारा जीवन है। जी हां प्रकृति के बिना मनुष्य का जीवन संभव नहीं है, लेकिन फिर भी हम विकास और आधुनिकता की दौड़ में पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं। हम प्रकृति से दूर जा रहे हैं। अब झरना, नदी, झील और जंगल देखने के लिए हमें बहुत दूर जाना पड़ता है। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने का खामियाजा हम समय-समय पर भुगत भी रहे हैं। कभी बाढ़ आ जाती है तो कभी बादल फटते हैं। कहीं धरती में पानी सूख रहा है तो कहीं की जमीन आग उगल रही है. ये सब क्लाइमेट चेंज की वजह से ही हो रहा है। पेड़ों के कटने से हवा इतनी दूषित हो गई है कि शहरों में सांस लेना भी मुश्किल हो गया है. कार्यक्रम में उपस्थित दाना पानी फॉरवड्र्स समुह के संयोजक राज चड्ढा ने कहा कि शहरों की लाइफ तो पर्यावरण और प्रकृति से बहुत दूर हो गई है, यहां रहने वाले लोगों को ऐसी बीमारियां हो रही हैं जो पहले न कभी सुनी और न कभी लोगों ने देखी। इन सबकी वजह कहीं न कहीं हमारी खराब होती लाइफस्टाइल भी है। विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर पूरी दुनिया में पर्यावरण को बचाने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाता है। इसलिए हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। मध्य प्रदेश पत्रकार संघ के संस्थापक एवं प्रदेश क्लब के अध्यक्ष राजेश शर्मा ने पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण को लेकर कहा कि ये पृथ्वी इंसान को दी हुई ईश्वर की सबसे बड़ी देन है। लेकिन इंसान का स्वभाव ही ऐसा है कि उसे चीजों की कदर तभी होती है जब वो उसे खो देता है। इंसान की गलतियों का खामियाजा पृथ्वी को भुगतना पड़ता है। प्रदूषण से पृथ्वी को बचाने के लिए विश्व पर्यावरण दिवस मनाने का चलन शुरू किया गया । विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर पूरी दुनिया में पर्यावरण को बचाने के लिए जागरूकता अभियान चलाया जाता है। इसलिए हर साल 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। मध्य प्रदेश पत्रकार संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेन्द्र माथुर ने कहा कि विकास के साथ दुनियाभर में पर्यावरण को नुकसान भी पहुंचाया जा रहा है। वन और जंगल नष्ट किए जा रहे हैं. नदी और झरने का रुख बदला जा रहा है। जिसकी वजह से पूरी दुनिया में प्रदूषण का लेवल बढ़ रहा है. बढ़ते प्रदूषण और प्रकृति को होने वाले नुकसान को कम करने को लेकर जागरूकता अभियान चलाने के लिए पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। इस दिन पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक किया जाता है. लोगों को प्रकृति को प्रदूषित होने से बचाने की अपील की जाती है. पर्यावरण को होने वाले नुकसान को देखते हुए पहली बार साल 1972 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने पर्यावरण दिवस मनाने की घोषणा की थी। तब से पूरी दुनिया में 5 जून पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। भले ही संयुक्त राष्ट्र संघ ने विश्व पर्यावरण दिवस मनाने की घोषणा की हो, लेकिन पहली बार स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में 5 जून 1972 को पर्यावरण सम्मेलन आयोजित किया गया था। इस सम्मेलन में लोगों को पर्यावरण को बचाने के बारे में जागरूक किया गया था। सम्मेलन में 119 देशों ने हिस्सा लिया था।

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