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काली पोस्टर विवाद: नरोत्तम मिश्रा बोले- अगर तत्काल फिल्म के पोस्टर नहीं हटाए तो आगे कड़ी कानूनी कार्रवाई करेंगे

काली पोस्टर विवाद: नरोत्तम मिश्रा बोले- अगर तत्काल फिल्म के पोस्टर नहीं हटाए तो आगे कड़ी कानूनी कार्रवाई करेंगे
डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘काली’ के पोस्टर को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है। भारत में इसको लेकर लगातार सोशल मीडिया पर चर्चा तेज है। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का भी बयान सामने आया है। नरोत्तम मिश्रा ने साफ तौर पर फिल्म के पोस्टर को हटाने की मांग की है और कहा है कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो आगे कड़ी कानूनी कार्रवाई करेंगे। अपने बयान में नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘काली’ में काली माता को सिगरेट पीते हुए दिखाना काफी आपत्तिजनक है। इस मामले में FIR करवाने के लिए बोलूंगा और फिल्म मध्यप्रदेश में कैसे प्रतिबधिंत हो इस पर विचार किया जाएगा।

मध्य प्रदेश के गृह मंत्री ने साफ तौर पर कहा कि अगर तत्काल फिल्म के पोस्टर नहीं हटाए तो आगे कड़ी कानूनी कार्रवाई करेंगे। आपको बता दें कि टोरंटो में रहने वाली फिल्मकार लीना मणिमेकलाई ने शनिवार को ट्विटर पर अपनी लघु फिल्म ‘काली’ का पोस्टर साझा किया था, जिसमें हिंदू देवी को धूम्रपान करते और हाथ में एलजीबीटीक्यू समुदाय का झंडा थामे हुए दिखाया गया है। भारतीय अधिकारियों ने कनाडा के अधिकारियों से फिल्म से जुड़ी सभी ‘‘भड़काऊ सामग्री’’ हटाने की अपील की है। इससे पहले फिल्म निर्माता लीना मणिमेकलाई ने सोमवार को कहा था कि वह जब तब जिंदा हैं तब तक बेखौफ अपनी आवाज बुलंद करना जारी रखेंग

दिल्ली और उत्तर प्रदेश पुलिस ने फिल्मकार लीना मणिमेकलाई के खिलाफ उनके वृत्तचित्र ‘काली’ के विवादास्पद पोस्टर के संबंध में प्राथमिकी दर्ज की है। दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शिकायत और सोशल मीडिया पोस्ट की सामग्री के आधार पर प्रथम दृष्टया भारतीय दंड संहिता की धारा के तहत 153ए(धर्म, नस्ल आदि के आधार पर दो समूहों में द्वेष को बढ़ावा देना)और धारा 295ए (जानबूझकर धर्म या उसकी मान्यताओं का अपमान कर धार्मिक भावना भड़काना) के तहत मामला बनता है। लखनऊ की हजरतगंज कोतवाली में फिल्मकार लीना मणिमेकलाई, निर्माता आशा एसोसिएट्स और संपादक श्रवण ओनाचन के खिलाफ सोमवार रात धारा 120—बी (साजिश रचने), 153—बी (राष्ट्रीय एकता के खिलाफ प्रभाव डालने वाले भाषण देना या लांछन लगाना), 295 (किसी वर्ग के धर्म का अपमान), 298 (धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के सुविचारित आशय से शब्द उच्चारित करना) समेत विभिन्न धाराओं तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियमकी धारा 66 और 67 के तहत मामला दर्ज किया गया है।

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